जिन्ना पर अकेले पड़े जसवंत


नई दिल्ली: पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को महान भारतीय बताने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह अपने बयान को लेकर अलग-थलग पड़ गए हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और शिवसेना के बाद अब भाजपा ने भी जिन्ना पर जसवंत के बयान से पल्ला झाड़ लिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह के उस बयान को उनकी निजी राय करार दिया है जिसमें उन्होंने कहा था किजिन्ना एक महान भारतीय थे। राजनाथ सिंह ने कहा है कि वो जसवंत सिंह के जिन्ना संबंधी बयान से इत्तेफाक नहीं रखते और न ही पार्टी का इस बयान से कोई लेना-देना है। उन्होंने कहा कि "जहां तक मैं समझता हूं जिन्ना कभी भी धर्मनिरपेक्ष नहीं थे।" इससे पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी जिन्ना के बारे में जसवंत सिंह के बयान से खुद को अलग कर लिया था। संघ के प्रवक्ता राम माधव ने सोमवार को कहा था कि संघ का इस बयान से कोई संबंध नहीं है।
भाजपा पर बरसे ठाकरे
इस बीच शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने जिन्ना की प्रशंसा करने पर भाजपा की कड़ी निंदा की है। ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में भाजपा नेताओं पर बरसते हुए आज कहा कि जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताना उन लोगों का अपमान है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना खून बहाया। बाल ठाकरे के अनुसार पहले आडवाणी ने जिन्ना की प्रशंसा कर वैचारिक भ्रम पैदा किया और अब जसवंत सिंह भी इस भ्रम को बढ़ावा दे रहे हैं।
शिवसेना प्रमुख ने कहा है कि "इस वैचारिक भ्रम की वजह से ही हिन्दू निराश हो गए हैं और इसका असर लोकसभा चुनावों पर भी देखा गया।" ठाकरे ने सामना के संपादकीय में पूछा है कि जिसने मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग की वो धर्मनिरपेक्ष कैसे हो सकता है। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी से पूछा है कि यदि जिन्ना धर्मनिरपेक्ष थे फिर आडवाणी सिंध प्रांत छोड़कर भारत क्यों आए। ठाकरे ने लिखा है कि "ऎसा लगता है भाजपा में खुद को जिन्ना का अनुयायी दिखाने के लिए प्रतिस्पर्धा हो रही है।" उन्होंने कहा कि "मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि अपने आपका कट्टर राष्ट्रवादी कने वाले भाजपा नेता बार-बार अपने सिद्धांतों से क्यों फिसल जाते हैं।"
उल्लेखनीय है कि भाजपा नेता जसवंत सिंह ने जिन्ना पर एक किताब लिखी है। पिछले दिनों उन्होंने एक निजी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में जिन्ना पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा था कि जिन्ना एक महान भारतीय थे। जसवंत सिंह ने यह भी कहा था कि भारत-पाक बंटवारे के लिए जिन्ना नहीं बल्कि नेहरू जिम्मेदार हैं। क्योंकि, नेहरू बहुत हद तक केंद्रीकृत नीति में विश्वास करते थे और यही चीज वह देश में लागू करना चाहते थे। जबकि जिन्ना एक संघीय नीति चाहते थे, जिसे यहां तक कि गांधी भी स्वीकार करते थे, जबकि नेहरू इससे सहमत नहीं थे। नेहरू 1947 तक संघीय भारत के रास्ते में खड़ा रहे।" जसवंत सिंह के अनुसार "हमने जिन्ना को गलत समझा क्योंकि हमें एक भय खड़ा करने की जरूरत थी। हमें एक भय की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि इस उपमहाद्वीप की 20वीं शताब्दी की सबसे बड़ी घटना देश काबंटवारा था।"
Rajasthan Patrika

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