क्यों वापस नहीं आता विदेशो का कला धन

आलेख - चन्दन कुमार
देर से ही सही लेकिन सभी राजनितिक दल विदेशो में जमा भारतीयों के काले धन की सच्चाई स्वीकार कर चुके है | सुरुवात में भाजपा, जेडीयू, माकपा, भाकपा जैसी पार्टियों ने चुनाव प्रचार के द्वारान कालेधन के मुद्दे को जोर शोर से उछाला तथा वादा किया की सत्ता में आने के बाद विदेशो में जमा कालाधन वे वापस लायेंगे भाजपा के पी एम इन वेटिंग लाल कृष्ण आडवानी को भी इस मुद्दे को केंद्र में लाने का श्रेय जाता है | इधर सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका के बाद केंद्र सरकार को भी जवाब देना पड़ा की मामले पर वह क्या कर रही है | हालाँकि याचिका को राजनीति से प्रेरित बताते हुए भी केंद्र सरकार को कालेधन के मुद्दे पर जवाब देना पड़ा | जिससे स्विस बैंको में कालेधन जमा कराये दो नामो का खुलासा भी हुआ | जिसमे से एक नाम तो जमशेदपुर से जुड़े उधोगपति का भी था | इस मामले में केंद्र सरकार के प्रयास संतोष जनक नहीं है | अलबत्ता इस बार के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से मुददों एक अकाल रहा, उसके बीच कालेधन एक मुद्दा बनाये जाने एक स्वागत किया जाना चाहिए | लेकिन जैसे की हमारे देश में होता है , चुनाव के बाद हर मुद्दे को राजनितिक दल भुला देते है | एक अनुमान के मुताबिक भारतीयों के २५ लाख करोड़ से लेकर ७० लाख करोड़ रूपी तक विदेशी बैंको में जमा है भ्रष्ट नेताओ, नौकरशाहों, द्वारा जनता के हक़ के पैसे मार कर
विदेशो में जमा कराये गए है | इन लोगो की लोबी इतनी मजबूत है की किसी भी सरकार के लिए कालेधन को वापस लाना आसान नहीं है | देश को लुटते चले आ रहे नेताओ और नौकरशाह पूरी कोशिश करेंगे की मामले को दबा दिया जाये | इसी लोबी के दबाव एक ही नतीजा था की जर्मनी सरकार द्वारा विदेशो में कालाधन जमा कराये भारतीयों की नामो की लिस्ट दिए जाने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार चुप्पी सधे बीती रही | इस बात की पूरी सम्भावना है की किसी भी दल की चाहे केंद्र में सरकार बने उसपर भरी दबाव होगा की काले धन के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दे यही पर नागरिक समाज की भूमिका अहम् हो जायेगी |
देश के प्रबुद्ध नागरिको एक कर्तब्य बनता है की वे १६ मई के बाद केंद्र में बनाने वाली सरकार पर लगातार दबाव बनाये रहे की देश हित से जुड़े इस अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे पर उचित व त्वरित कारवाई करे | आर्थिक मंदी से जूझ रहे भारत को विदेशो में जमा कालाधन बहुत बड़ा राहत प्रदान कर सकता है | आज जो पैसा विदेशी बैंको में पड़ा सड़ रहा है | यदि उसे देश में निवेश किया गया होता तो भारत विकसित देशो की श्रेणी में आज गिनती होती खैर देर आये दुरुस्त आये की कहावत पर अमल करते अब से भी इस रकम वापस लाकर देश के विकास में लगाया जाये साथ ही उन सफद पोश लुटेरो को भी कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए | जिन्होंने देश के धन लूटकर विदेशो में जमा किया है | आज यह जान कर किसी भी भारतीय का सर शर्म से झुक जाता है की विदेशी बैंको में कालाधन जमा करने के मामले में भारतीय अव्वल है | आखिर ऋषि - मुनियों की इस पवन धरती पर इतने भ्रष्टाचारी कैसे फल फुल रहे है | कानून के डर के आभाव में पैसे के जोर पर सबकुछ खरीद लेने के विस्वास के बूते ही भारत घपलेबाजों के लिए उर्वरा भूमि बन गई है | जबतक देश के इन गद्दारों को सजा नहीं मिलेगी देश में भर्ष्टाचार पर अंकुश लगाना संभव नहीं होगा.

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