नेताओ के देश प्रेम


भारत में तीन विचारधारा के लोग होते है पहले वैसे लोग आते है जो इस देश को अपना तो मानते है पर इस देश के लिए कुछ करना नही चाहते है दुसरे वे लोग आते है जो इस देश में रहते है लेकिन गुणगान दुसरे देश का करते है मेरा इशारा आप समझ गए होंगे और तीसरे वैसे लोग आते है जो देश में रहते भी है और इसे अपना भी मानते है और उनके मन में देश के प्रति कुछ करने की सोच भी होती है. जब देश में रह रहे लोगो में देश के प्रति कोई लक्ष्य ही नही रहेगी तो देश क्या खाख तरक्की करेगा जब एक आतंकवादी संसद हमले में पकड़ा जाता उचतम न्यायालय द्वारा दोषी ठहरा देने के बाद फाँसी की सजा सुना दी जाती है लेकिन उसे आज तक फाँसी नही दिया गया है. क्या ये वही भारत है जो आजादी के समय सरदार भगत सिंह को फाँसी पर चढाया गया था . हमें नही भूलना चाहिए की जब देश आजाद नही हुआ था और जब हमारे क्रांतिकारी ने अपनी आवाज अंग्रेजो तक पहुँचने के लिए उनके असेम्बली में बम फेका था जो किसी को मारने के लिए नही बल्कि अंग्रेजो को भारत से आजाद कराने के लिए. मुझे पता नही लेकिन उस समय जो कांग्रेस में लोग रहे थे पंडित जवाहर लाल नहरू, महात्मा गाँधी, और कई बड़े नेता जो अगर चाहते तो उनकी फाँसी को टलवा सकते थे लेकिन ऐसा नही हुआ परन्तु अगर हम ये जरुर कह सकते है की जब अफजल गुरु जैसे लोग इस लोकतंत्र के संसद भवन पर हमला करके आराम की जिंदगी जी रहा है मैं कहना सिर्फ़ यही सहायता हूँ की कल की कांग्रेस की सरकार जो हमारे vir भगत सिंह के फाँसी को टाल नही सकी और और आज की कांग्रेस की सरकार है जिसे बचाने की लिए पुरी UPA की सरकार लीगी हुई है. अफजल गुरु कौन है जो इससे कांग्रेस की सरकार फाँसी देने से घबरा रही है पूछने पर पता चलता है की अभी फाइल आगे बढ़ रही है. अगर एक देश भक्त को ये कांग्रेस बचा नही सकती है तो एक आतंकवादी को क्यों बचा रही है. अगर हम कहे तो ये वैसे विचारधारा के लोग है जिसे हम गिन नही सकते है ये भटके हुए लोग है या इस देश को भटकने की कोशिश कर रहे है भारत के लोगो में इतने सोचने समझने की बुद्धि तो है क्योंकी आने वाले जो चुनाव में जो हो रहे है और कांग्रेस की सरकार लगातार हार हरी है इसका मुख्य कारण ये भी है क्यों किसी आतंकवादी को फाँसी पर चढाने के लिए ३ साल का समय लगता है और कोई आम आदमी को फाँसी पर चढाने के लिए २ दिन का भी समय नही लगता है कभी कभी तो मुझे ये समझ में नही आता है के हमारे देश के नेता क्या वाकई भारत के है या कही से इंपोर्ट किए गए है क्यों की देश प्रेम की भावना है ही नही चलो ज्यादा लिखूंगा तो पड़ने वाले मेरे मित्र दुखी हो जायेंगे और नही लिखुगा तो मेरे देश के भाई बंधू दुखी हो जायेंगे भाई ये नही समझना की मैं किस विचारधारा का हूँ बस आप को पढ़ना है और कर भी क्या सकते है मन में सवाल तो आयेंगे की देश के बारे में सोचने के लिए नेता तो है ही आगे जारी है .........

1 टिप्पणियाँ:

नारदमुनि 29 अक्तूबर 2008 को 7:21 am  

wah jee wah aapne to kamal kar dita, balle balee jee. narayan narayan narayan

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