मदरसों को मान्यता सरस्वती मंदिरों पर बैन |

एक ओर विद्या भारती द्वारा चलाए जा रहे विद्यालय "सरस्वती मन्दिर" की मान्यता को रद्द करने की मांग समय समय पर उठती रहती है वो भी केन्द्र सरकार में रह रहे मंत्रियो राम बिलास पासवान और लालू जैसे मंत्री द्वरा और दूसरी और मदरसों को मान्यता देने की बात हो रही है क्यों हम भूल जाते है की सभी धर्म एक सामान है ये मैं नही हमारे मंत्री समय समय पर कहते है फ़िर भी एक भारत में दो तरह की बात क्यों होती है, उन्हें मालूम होना चाहिए की "सरस्वती मन्दिर" भारत में सबसे बड़ी प्राइवेट स्कूल चलती है जिसमे हिंदू रीती रिवाजो के अनुसार शिक्षा दी जाती है, मदरसों में CBSE, UGC किसी भी प्रकाशन की पुस्तकों की पढ़ाई नही होती, फ़िर भी ये केन्द्र सरकार क्यों मान्यता देने पर तुली हुई है कुछ लोगो के विचारो से लगता है की ये केन्द्र सरकार का चुनावी लड्डू है अल्पसंख्यको के लिए क्योंकी चुनाव आने पर मुस्लिम वोटरों को लुभाने की हर राजनैतिक संगठन कोशिश करता रहता है फ़िर भाजपा हो या कांग्रेस पहले तो मदरसों की स्थिति को सुधरा गया फ़िर मान्यता वह क्या चुनावी हथकंडा है |

2 टिप्पणियाँ:

बेनामी,  27 दिसंबर 2008 को 12:26 pm  

Jai "Shri Ram" jii

Suresh Chandra Gupta 27 दिसंबर 2008 को 1:03 pm  

भारत के लिए जैसा पाकिस्तान है, बैसे ही हिन्दुओं के लिए कांग्रेस और लालू, पासवान जैसे राजनीतिबाज हैं.

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